Tuesday, May 17, 2011
Saturday, May 7, 2011
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Friday, April 29, 2011
Tuesday, April 26, 2011
Monday, April 25, 2011
Sunday, April 24, 2011
Homage to Satya Sai Baba
Friday, April 22, 2011
Wednesday, April 20, 2011
Tuesday, April 19, 2011
Wednesday, April 13, 2011
वो आखिरी शाम छः साल के सफ़र की
आप शायद कुछ सोचने ही वाले हों इससे पहले ही मैं स्पष्ट कर दूं की ये
बात हो रही है मेरे और विद्या मंदिर के बीच के छः साल लम्बे सफ़र की आखिरी शाम यानि की विदाई समारोह की और इस हेतु लिखे गए स्पीच की जो इस प्रकार है -
चार्वाक का दर्शन कहता है की वे लोग मूर्ख हैं जो सुख को भूल जाते हैं क्योंकि यह तो दर्द के साथ मिश्रित है I एक किसान जिस तरह से छिलकों से दानों को अलग कर अनाज को रख लेता है और भूसे को फेंक देता है उसी तरह एक ज्ञानी व्यक्ति को चाहिए की वह सुखों का आनंद उठाये और दर्द को भूल जाये I वे लोग जो इस संसार के त्वरित सुखों को छोड़ कर माध्यम और स्वर्ग के अनिश्चित सुखों को पाने की कामना करते हैं,ज्ञान प्राप्त करने के लिए अपने को समर्पित करते हैं I
चार्वाक का दर्शन एक पक्षीय है I यह विश्वास करना कोरी मूर्खता है की मनुष्य के प्रयासों का लक्ष्य पाशविक अभिलाषायों की तुष्टि मात्र है और इसी लिए दैविक सत्ता का अहसास और विश्वशनीय तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहन दर्द से मुक्ति दिलाता है I हमारे तथाकथित तत्त्व चेतना रहित होते हैं अतः चेतना उनके मिश्रण का परिणाम नहीं है I यह कहना गलत है की चैतन्यता का विनाश होता है अथवा विद्यमान रहती है जबकि मादकता को उत्पन्न भी किया जा सकता है और हटाया भी जा सकता है Iमादकता के भावों से भाव प्रवण हुआ जा सकता है लेकिन चैतन्यता से विहीन नहीं I
सभी चीजों का विनाश होना है या चीजें विलुप्तता की स्थिति में पहुँच जानी है लेकिन किसी भी चीज का हमेशा के लिए विनाश नहीं होना है और यह है यादें हमारे प्यारे विद्या मंदिर की I
धरती पर विचरते दूसरे ग्रह के प्राणी
आप शायद सोच रहे हो की ये तो वही पुराना किस्सा है और इसका सत्य से कोई सम्बन्ध नहीं है मगर जरा फिर से सोचिये ये किसी दूसरे ग्रह के प्राणी और कोई नहीं हम ही है क्योकि हमारा वास्ता अब न तो अपने पड़ोसियों,नगरवासियों और न ही मानव जाति से रह गया है क्योकि अब तो हमें केवल अपनी चिंता है देश की जिम्मेदारी तो सरकार की है विश्व की जिम्मेदारी तो दूसरों की है हमें इन सबसे क्या? क्या हमारे पास दूसरा कोई काम नहीं है जो इन सबकी चिंता करें हमारे इन्ही सदविचारों ने हमारी भूमि को इस कदर दूषित कर दिया है की शायद आगे की पीढ़ियों को धरती की याद दिलाने के लिए हमें केवल तस्वीरों से ही काम चलाना पड़ेगा क्योकि सुदूर अंतरिक्ष से धरती तक आना मार्क शटलवर्थ जैसों के लिए ही संभव हो सकेगा कम से कम और कुछ नहीं कर सकते प्रदूषण रोक नहीं सकते तो और फैलाएं तो नहीं अपनी जिम्मेदारी को समझें अन्यथा हम सब में और परग्रहियों में अंतर ही क्या रह जायेगा.
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